ग़ज़ल
जिसको भी सत्ता का नशा चढ़ जाता है
उसको सच क्या है समझ नहीं आता है
मुझसे बढ़कर कोई नहीं यह अहंकार है
चक्र समय का इनको भी खेल दिखाता है
समय किसी को देता ज्यादा समय नहीं
आने पर समय अपना रूप दिखलाता है
अहिरावण महिरावण रावण तो चले गए
देखिए आगे किसका नंबर अब आता है
परिभाषाएं हर युग में ही बदलती रहती हैं
ऐसे ही परिवर्तन पूरे ही जगत में आता है
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव
