अँगूठे का ही जमाना है
आपके पास कुछ हो ना हो। लेकिन एक फोन और फुर्सत का ढ़ेर सारा समय होना चाहिए। आप मोबाइल खोलिए और लोगों की पोस्ट पर लाईक कीजिए। आजकल लोग कुछ कर रहे हों या ना कर रहें हों। आजकल हर आदमी बिजी है। और मोबाइल पर लगा हुआ है। और बैठे- बैठे अँगूठा लगा रहे है। अगर आज के समय में आप सामने वाले को निरोगी और स्वस्थ्य देखना चाहते हैं तो बस उस
की पोस्ट पर अँगूठा लगाते जाईए। और सामने वाला अपने आप निरोगी तन पा लेगा। इसका यकीन आप मान लीजिए। अँगूठा आज के दौर में सँजीवनी बूटी का काम कर रहा है। सरकार से लेकर आम आदमी तक सबकी भलाई ये अँगूठा ही कर रहा है। हम सब इस अँगूठे के गुलाम होते जा रहें हैं। सरकार चावल , आनाज , धोती, राशन देने के लिए अँगूठा या ऊँगली की छाप ले रही है। इस तरह सरकारी योजनाओं में आदमी आज अँगूठे या हाशिए पर आ गया है। बस अँगूठा लगाईए और राशन और मुफ्त की सुविधाएँ उठाईए। इस अँगूठे की संस्कृति और मुफ्तखोरी की आदत ने हमें कोढ़िया बना दिया है। और हमारे दिमाग को कुँद कर दिया है। किसी को काम नहीं करना है। बस अँगूठा लगाना है और खाते पैसे में पैसा आ गया। बस अँगूठा लगाना है और खाधान्न थैले में आ गया। सोचने- समझने की जरूरत नहीं है। सोचता हूँ अँगूठा ना होता तो बुद्धि घास चरने नहीं गई होती। इसी अँगूठे की कृपा से बुद्धि घास चरने चली गई है। आज हर तरफ कामचोरी और मुफ्तखोरी इसी अँगूठे और ऊँगली के चलते बढ़ गयी है। अच्छे -खराब या फूहड़ नृत्य पर अँगूठा लगाईए। बकवास बात पर भी लाफिंग इमोजी भेजिए। आजकल अड़ोस -पड़ोस के लोगों में केवल और केवल बातचीत इसलिए भी बँद है, कि वे एक- दूसरे की पोस्ट पर अँगूठा नहीं लगाते। बात यहीं नहीं रूकी जाती है। जो कभी स्कूल-काॅलेज नहीं गए। जिनको अक्षर ज्ञान नहीं है। वो भी गूगल माईक का इस्तेमाल करके अपना ज्ञान बाँच रहें हैं।
और यकीन मानिए यही लोग इस समय सच्चे और अच्छे जानकार हैं। यही लोग सोशल मीडिया के एक्सपर्ट भी हैं। और यही लोग इस समय सोशल मीडिया पर ज्ञान देने से नहीं चूक रहे हैं। जो व्हाटसएप यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं। जिनकी जानकारी तथ्यपरक तो कतई नहीं हैं। ऐसे लोग हर बात में लबर -लबर करते आपको मिल जाएँगें। तो यही मौका है आप भी फैलकर बैठ जाईए और सोशल मीडिया पर अपने ओपिनियन दीजिए। आईए पसरिए , फैलिए और सोशल मीडिया पर ज्ञान दीजिए। अँगूठे का जमाना जो है।
— महेश कुमार केशरी
