गीत/नवगीत

आज रचे नव भोर में

आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।
सौरभ अपनापन रहे, धर कर रूप पुनीत।।

नई सुबह की रोशनी, लेकर आए आस।
मन में प्रेम जगाइए, हर चेहरे पर हास।
मिल-जुलकर हम गढ़ सकें, सुंदर जग की रीत—
आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।।

बीती रातें छोड़कर, आगे बढ़ते मीत।
सत्य-धर्म की राह पर, चलो जलाएँ दीप।
नव सपनों को दे चलें, मेहनत की संगीत—
सौरभ अपनापन रहे, धर कर रूप पुनीत।।

जाति-धर्म की बात सब, मन से कर दें दूर।
मानवता के रंग में, मिल हो हम भरपूर।
प्रेम बने पहचान अब, मिटे भेद की रीत—
आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।।

शब्दों में हो माधुर्य, कर्मों में हो नेह।
दुख में साथी हम बने, सुख में बाँटें स्नेह।
हर आँगन में गूँज हो, खुशियों की नव रीत—
सौरभ अपनापन रहे, धर कर रूप पुनीत।।

ज्ञान-विज्ञान के साथ में, संस्कारों का मान।
नई सोच के संग रहे, अपनी मिट्टी शान।
प्रगति करे संसार पर, बची रहे मन प्रीत—
आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।।

नारी को सम्मान दें, बच्चों को दें ज्ञान।
श्रमिक के श्रम का करें, दिल से हम सम्मान।
समानता के दीप से, जगमग हो हर जीत—
सौरभ अपनापन रहे, धर कर रूप पुनीत।।

प्रकृति हमारी माँ सरी, इसका रखें खयाल।
नदियाँ, वन, पर्वतों से, पूछें उनका हाल।
हरियाली के साथ हो, जीवन की संगीत—
आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।।

मन में आशा, आँख में, सपनों की सौगात।
हाथों में विश्वास हो, किस्मत का हो साथ।
सौरभ प्रेम-सद्भाव से, महके जीवन-रीत—
आज रचे नव भोर में, नए दौर के गीत।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh