गर्वित होकर जिंदगी
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।
जीवन की हर राह पर, सच्चाई का साथ।
मन में रखिए प्रेम को, हाथों में हो हाथ।
कर्मों से पहचान हो, निर्मल हो हर लेख—
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।।
बीते कल की भूल से, सीखें नया प्रकाश।
मेहनत को आधार दें, मन में रखें विश्वास।
आँधी आए राह में, मुड़कर के मत देख—
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।
दीन-दुखी के दर्द को, अपना समझें पीर।
नेकी की राहों चले, बनकर सदा फकीर।
जिसके कारण मुस्कुरा, दुखता चेहरा एक—
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।।
ज्ञान-दीप जलता रहे, मिटे जगत अंधकार।
वाणी में मधुरता रहे, कर्मों में संस्कार।
शब्द-शब्द में सत्य हो, भाव रहें आलेख—
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।
नाम नहीं बस काम से, जीवन हो पहचान।
अपने अच्छे कर्म से, बढ़े देश का मान।
जग में जब तक साँस हो, रखते रहें विवेक—
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।।
माटी से उठकर सदा, माटी का रखिए मान।
अपनों के सुख-दुख में, बनिए सच्चे इंसान।
जीवन ऐसा छोड़िए, याद करे हर एक—
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
