नन्हा मन, बड़ा ज्ञान
नन्हे-नन्हे हाथ में,
सपनों का संसार।
पढ़ते-सीखते मुस्कुराएँ,
हो ज्ञान अपार।।
किताबों से दोस्ती करें,
सीखें नई बात।
मेहनत से ही खिल उठे,
जीवन की हर पात।।
टैबलेट हो या पुस्तकें,
सीखें हँसते-खेल।
ज्ञान बने जब मित्र तो,
आसान हर एक खेल।।
आँखों में हैं स्वप्न नए,
मन में नई उड़ान।
आज पढ़े जो ध्यान से,
कल पाए सम्मान।।
खेल-खेल में सीखना,
सबसे सुंदर रीत।
नन्हे कदमों से रचें,
खुशियों वाली जीत।।
माता-पिता का मान रख,
गुरु का रख सम्मान।
अच्छे संस्कारों से ही,
बनता जीवन महान।।
नन्हा मन जब सीखता,
जग लगता आसान।
मेहनत, शिक्षा, संस्कार से,
ऊँचा हो इंसान।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
