निस्बत किससे!
विधा- कविता
शीर्षक- निस्बत किससे!
निस्बत न बना ऐसे लोगों से,
जो बस स्वार्थ के लिए,
सामने मीठा-मीठा बोलते हैं,
पीठ पीछे छुरा भोंकते हैं।
निस्बत रख साहस और लगन से,
जो जिंदगी को जीवंत बनाते हैं,
सफलता की सीढ़ियां चढ़ाते,
आनंद की कलियां महकाते हैं।
निस्बत रख अपने देश की माटी से,
जिसने जन्म दिया, पालन-पोषण किया,
देशद्रोहियों से निस्बत न रखना,
जिन्होंने अपने ही देश का शोषण किया!
निस्बत रख खुद के स्वाभिमान से,
स्वाभिमान ही तेरी पहचान बने,
निस्बत रख खुदा की खुदाई से,
उसकी कृपा से तेरा सम्मान बढ़े।
(निस्बत का अर्थ- संबंध,लगाव,ताल्लुक)
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
