कविता

निस्बत किससे!

विधा- कविता
शीर्षक- निस्बत किससे!

निस्बत न बना ऐसे लोगों से,
जो बस स्वार्थ के लिए,
सामने मीठा-मीठा बोलते हैं,
पीठ पीछे छुरा भोंकते हैं।

निस्बत रख साहस और लगन से,
जो जिंदगी को जीवंत बनाते हैं,
सफलता की सीढ़ियां चढ़ाते,
आनंद की कलियां महकाते हैं।

निस्बत रख अपने देश की माटी से,
जिसने जन्म दिया, पालन-पोषण किया,
देशद्रोहियों से निस्बत न रखना,
जिन्होंने अपने ही देश का शोषण किया!

निस्बत रख खुद के स्वाभिमान से,
स्वाभिमान ही तेरी पहचान बने,
निस्बत रख खुदा की खुदाई से,
उसकी कृपा से तेरा सम्मान बढ़े।
(निस्बत का अर्थ- संबंध,लगाव,ताल्लुक)
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244