वरिष्ठ नागरिक आशीर्वाद हैं
(वरिष्ठ नागरिक दिवस- 21 अगस्त विशेष)
विधा- कविता
शीर्षक- वरिष्ठ नागरिक आशीर्वाद हैं
वरिष्ठ नागरिक बोझ नहीं हैं,
आशीर्वाद हैं,
पालन-पोषण-प्रेरणा से,
करते आबाद हैं।
वरिष्ठ नागरिक घर की रीढ़ हैं,
सहारा देते हैं,
अनुभवों के आगार हैं,
सही सलाह देते हैं।
क्रोध करना एक विकार है,
वे बताते हैं,
मन को भटकाने वाली राह से,
वे बचाते हैं।
बिना वजह भी खुशी महसूस करो,
उनकी खुशी का राज,
बुजुर्गियत में वे अकेले न पड़ जाएं,
बजाते रहना ऐसा साज।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
