कविता

साथ तेरा जो पाया

विधा- कविता
शीर्षक- साथ तेरा जो पाया

जन्म-जन्म की तृष्णा मिट गई,
साथ तेरा जो पाया,
तेरी मृदु मुस्कान से ही मेरा,
तन-मन है मुस्काया।

मेरे मन के सूने आँगन को,
तेरे प्रेम ने ही है सजाया,
इसी से मन को चैन मिला है,
साथ चले तेरा साया।

मेरी राहों की भटकन को,
तूने ही है संभाला,
जीवन मधुर बहार बन गया,
मन में हुआ उजाला।

चाह न कोई शेष रही अब,
तेरा मिला सहारा,
तेरे संग ही महक उठा है,
मन का मधुबन प्यारा।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244