साथ तेरा जो पाया
विधा- कविता
शीर्षक- साथ तेरा जो पाया
जन्म-जन्म की तृष्णा मिट गई,
साथ तेरा जो पाया,
तेरी मृदु मुस्कान से ही मेरा,
तन-मन है मुस्काया।
मेरे मन के सूने आँगन को,
तेरे प्रेम ने ही है सजाया,
इसी से मन को चैन मिला है,
साथ चले तेरा साया।
मेरी राहों की भटकन को,
तूने ही है संभाला,
जीवन मधुर बहार बन गया,
मन में हुआ उजाला।
चाह न कोई शेष रही अब,
तेरा मिला सहारा,
तेरे संग ही महक उठा है,
मन का मधुबन प्यारा।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
