युवा, बनो देश का मान
(21 अगस्त “विश्व उद्यमिता दिवस” पर विशेष)
विधा- कविता
शीर्षक- युवा, बनो देश का मान
तुम कौशल के भंडार हो,
शक्ति-स्वरूप साकार हो,
साहस का सदुपयोग करो,
अनंत प्रगति का आधार हो।
नींद को ख्वाब से जगाओ
दुःख-दर्द से दो-दो हाथ करो,
उद्यमिता के आगोश में जाओ,
अपने कौशल का प्रदर्शन करो।
सिर्फ नौकरी का चक्कर छोड़ो,
कोई नया व्यवसाय खड़ा करो,
अब तक एक-से-एक ग्यारह होते थे,
ग्यारह करोड़ का व्यापार कर दिखाओ।
युवा, बनो खुद अपना रोजगार,
खड़ा करो उनको, जो हैं लाचार,
काम कोई भी छोटा नहीं होता,
फूलो-फलो करके कुछ नवाचार।
अपने सपनों की रफ्तार बढ़ाओ,
खुद को पहचानो, बढ़ाओ शान,
विकास-पथ पर देश अग्रणी हो,
ऐसा करो प्रयास, बनो देश का मान।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
