कविता

युवा, बनो देश का मान

(21 अगस्त “विश्व उद्यमिता दिवस” पर विशेष)

विधा- कविता
शीर्षक- युवा, बनो देश का मान

तुम कौशल के भंडार हो,
शक्ति-स्वरूप साकार हो,
साहस का सदुपयोग करो,
अनंत प्रगति का आधार हो।

नींद को ख्वाब से जगाओ
दुःख-दर्द से दो-दो हाथ करो,
उद्यमिता के आगोश में जाओ,
अपने कौशल का प्रदर्शन करो।

सिर्फ नौकरी का चक्कर छोड़ो,
कोई नया व्यवसाय खड़ा करो,
अब तक एक-से-एक ग्यारह होते थे,
ग्यारह करोड़ का व्यापार कर दिखाओ।

युवा, बनो खुद अपना रोजगार,
खड़ा करो उनको, जो हैं लाचार,
काम कोई भी छोटा नहीं होता,
फूलो-फलो करके कुछ नवाचार।

अपने सपनों की रफ्तार बढ़ाओ,
खुद को पहचानो, बढ़ाओ शान,
विकास-पथ पर देश अग्रणी हो,
ऐसा करो प्रयास, बनो देश का मान।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244