भव से तर जाना सरल है
आ गए मोहन ह्रदय में अब निकल पाना कठिन है
भव से तर जाना सरल है-
1.
सौप दी जब डोर जीवन की प्रभु के हाथ में
सारथि हों जब प्रभु तो रथ का सधना भी सरल है भव से तर-
2.
गहरी नदिया नाव पुरानी मीलों तक पानी-ही-पानी
हों खिवैया जब प्रभु तो नाव का तरना सरल है भव से तर-
3.
बनके चातक स्वाति-प्रभु की छांव में जो रह सके
स्वाति की इक बूंद ही से भीगना उसका सरल है भव से तर-
4.
वरद-हस्त प्रभु ने जिसके शीश पर हो रख दिया
उसकी तृष्णा बुझ गई है तृप्त हो जाना सरल है भव से तर-
5.
जन्मों की भटकन थमी जब शरण प्रभुवर की मिली
हों दरश कण-कण में प्रभु के शांति का मिलना सरल है भव से तर-
