होते वो मशहूर
अगर सत्य हो बोलना, झटपट बोलो यार,
पर असत्य के बोल से, प्रथम सोच सौ बार।
फुदक फुदक चलते रहे, पक्षी थे नादान,
पर जैसे ही पर मिले, उड़े देश अनजान।
पतझर में वीरान थे, बाग़ बगीचे यार,
पर कांटे थे बाग में, हरदम सदाबहार।
दिल के सारे फैसले, होते सच से दूर,
जो दिमाग से काम लें, होते वो मशहूर।
— महेंद्र कुमार वर्मा
