वजूद
जिंदगी यूं ही कट जाएगी बदगुमानियो में
मंजिल यूं ही मिल जाएगी नाकामियों में !
बेबस जो हुए है अपनी ही मजबूरियो में
किस्मत की ठोकरो से पड़े रह जाएगे राह में !
हमने कब कहा – शिकायत है किसी से
शिकायत भी हमारे साथ दफन हो जाएगी कब्र में !
इम्तिहान-दर -इम्तिहान लेती रही है जिंदगी
नतीजा कब मिलती है ? —-रहे जिंदगी में !
बड़ी हसरत से तकते है आसमा को रोज ही
काश आसमा का कोई टुकड़ा होता मेरे वजूद में !!
— विभा कुमारी “नीरजा”
