कविता

कविता

जिंदगी के सफर में अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है,
मुश्किल राहों पर गिरकर खुद ही संभलना पड़ता है।
कौन देता है साथ यहाँ उम्र भर के लिए,
हर किसी को एक दिन रुखसत करना पड़ता है।
​राहों में धूप मिले तो भी मुस्कुराकर चलना सीखो,
क्योंकि छाँव की तलाश में अक्सर कदम थक जाते हैं।
जो खो गया उसे भूलकर नए सवेरे की ओर देखो,
सपनों के आशियाने यूँ ही नहीं बनते, मेहनत से सजाने पड़ते हैं।
​वक्त का पहिया हर पल घूमता रहता है लगातार,
कभी खुशी का मौसम आता है, तो कभी गम की फुहार।
अपनी उम्मीद का दीया हमेशा जलाकर रखना तुम,
अंधेरी से अंधेरी रात के बाद ही होता है नया उजाला और नया बहार।

— हेमंत सिंह कुशवाह

हेमंत सिंह कुशवाह

राज्य प्रभारी मध्यप्रदेश विकलांग बल मोबा. 9074481685