ग़ज़ल
बेमतलब की हल्की बातें हंकी फंकी चालू रख
अच्छे दिन के ढोल बजाकर काल कलंकी चालू रख
नैतिकता ईमान धरम के झाँसे में हरगिज मत आ
सीधी चाल नही कुछ देगी टेढी बंकी चालू रख
पूरा ध्यान लगा कथनी पे वक्त गँवा मत करनी में
पब्लिक नौटंकी में ख़ुश है बस नौटंकी चालू रख
विश्व गुरू को अपमानित करने वालों के उत्तर में
कूद उछल से जैसे कोशिश करता मंकी चालू रख
रहना है यदि ख़ास तुझे तो ये ही तक तरीका है
आगे पीछे आजू बाजू रखना डंकी चालू रख
यारों पे खलिहान लुटाकर पब्लिक की ख़ातिर बंसल
रत्ती तौला मासा पैया सेर छटंकी चालू रख
— सतीश बंसल
