धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वसुधैव कुटुम्बकम्

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सनातन धर्म के सबसे सुंदर और गहरे विचारों में से एक है। यह महाउपनिषद् के अध्याय 6 में मिलता है।
अगर हम इसका संधि विच्छेद (टुकड़े) करें, तो यह तीन शब्दों से मिलकर बना है:
वसुधा = धरती/पृथ्वी
एव = ही
कुटुम्बकम् = परिवार
सरल अर्थ: पूरी धरती ही मेरा परिवार है (The world is one family)।

मूल श्लोक और उसका महत्व
यह विचार सिर्फ दो शब्दों का नहीं है, बल्कि एक पूरे श्लोक का हिस्सा है जो हमें संकीर्ण (छोटी) सोच से ऊपर उठना सिखाता है:
अर्थ:
“यह मेरा है और वह पराया है, ऐसी सोच छोटे मन वाले (संकीर्ण सोच वाले) लोगों की होती है।”
“जो उदार चरित्र के लोग होते हैं (जिनका दिल बड़ा होता है), उनके लिए पूरी धरती ही उनका परिवार होती है।”

इस विचार की मुख्य बातें (यह हमें क्या सिखाता है?)
सीमाओं से परे जाना: यह संदेश देश, धर्म, जाति, भाषा और रंग के भेदभाव से ऊपर उठकर हर इंसान को एक-दूसरे से जोड़ने की बात करता है।
वैश्विक शांति (Global Peace): जब हम पूरी दुनिया को अपना परिवार मानेंगे, तो नफरत, युद्ध और हिंसा की जगह प्यार, करुणा और सहयोग ले लेंगे।
प्रकृति से जुड़ाव: इस विचार में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और पूरी प्रकृति शामिल है। यानी पूरी सृष्टि की रक्षा करना हमारा फर्ज है।

आज के समय में इसकी प्रासंगिकता (Relevance)
आज की तारीख में यह विचार पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो चुका है। क्लाइमेट चेंज (पर्यावरण संकट), महामारियां और आर्थिक चुनौतियां जैसी चीज़ें किसी एक देश की नहीं हैं। इनसे निपटने के लिए पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह मिलकर काम करना होगा।
भारत ने हमेशा इस विचार को अपनी विदेश नीति और संस्कृति का हिस्सा बनाया है। (जैसे भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन की थीम भी ‘One Earth, One Family, One Future’ रखी थी, जो इसी का अनुवाद है)।
संक्षेप में कहें तो, यह विचार हमें ‘स्वार्थी’ होने के बजाय ‘परमार्थी’ होना सिखाता है।

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845

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