गीत/नवगीत

विफल करें हर चाल

झूठी-साज़िश गढ़ रहे, , फैलाएँ भ्रम-जाल।
सजग रहे जन-गण सभी, विफल करें हर चाल॥

सदा देश की एकता, इनको अखरे पार्थ।
भेदभाव की आग से, सेके अपना स्वार्थ॥

राष्ट्रहितों को छोड़कर, करते केवल शोर।
जनता समझे भेद सब, अब न चलेगा जोर॥

बात-बात पर खोजते, नित नया विवाद।
मिल-जुलकर रहना मगर, देश रहे आबाद॥

स्वार्थ-सिद्धि की चाह में, बाँटें जाति-समाज।
प्रेम-सद्भावों से बने, भारत का सिरताज॥

अफवाहों के पंख पर, उड़ते इनके बोल।
सत्य-सूर्य के सामने, खुलते सारे खोल॥

नफ़रत के व्यापार से, मिलता कब सम्मान।
प्रेम-एकता से बढ़े, भारत की पहचान॥

जन-मन को बरगला सकें, इतना नहीं आसान।
सत्य खड़ा है साथ में, लेकर दृढ़ अभियान॥

‘सौरभ’ मिलकर देश का, रखें सभी हम मान।
एकजुट होकर बढ़े, अपना हिन्दुस्तान॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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