रासावलय छंद रचना
जलते हैं हमसे, देख हमें चहकते।
लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।।
मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया।
परम कृपा हम पर, हैं मेहरबानियाँ।।
मंगल दीप देखें, क्यों चाहे बुझाना।
सजे द्वार आँगन, हँसी शोर मिटाना।।
आनंदित मानस, भाव आप सहेजो।
स्नेह प्रेम धारा, उजियारा गहे जो।।
झरती ये बूँदें, शीतलता बरसती।
प्यासा था मन, तृप्ति हृदय छलकती।।
नैनों में आशा, तन-मन हैं हर्षिता।
कलियाँ पट खोलें, चहक रहीं सुष्मिता।।
ओस बूँद दमके, पात-पात डोलती।
शृंगारित रमणी, सृष्टि रूप शोभती।।
भ्रमर मधुर गूँजन, तान नवल छेडती।
लहर-लहर खुशियाँ, लुका-छिपी खेलती।।
