हिंदी खुद अपनी पहचान
विधा- कविता
शीर्षक- हिंदी खुद अपनी पहचान
शब्द-शब्द में हिंदी भाषा,
कण-कण में है हिंदुस्तान,
हिंदी है तो हम जीवंत हैं,
हिंदी खुद अपनी पहचान।
सबसे ज्यादा बोली जाती,
देश-विदेश में पाती सम्मान,
अब तो व्यापारी शिक्षा में भी,
हिंदी ने है बढ़ाई अपनी शान।
ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ,
हिंदी भाषा की पहुंच नहीं है,
माँ की मीठी लोरी में है हिंदी,
पिता की आशीष जहाँ हिंदी वहीं है।
होली में हिंदी, दिवाली में हिंदी,
तिरंगे के तीन रंगों में हिंदी,
राधा-कृष्ण के प्यार में रमी है,
बंधी है राखी के धागों में हिंदी।
मीठी सरगम से सजती हिंदी,
माटी की खुशबू में रमती हिंदी,
हिंदी हिंदुस्तान का स्वाभिमान है,
भारत मां की सुता चहेती हिंदी।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
