कविता

राधाष्टमी

विधा- कविता
शीर्षक- राधाष्टमी

ब्रज मंडल की अविश्वतरी देवी राधिके,
कुंज-कुंज में गूँज उठी, राधा-राधा पुकार,
कदंब तले श्याम खड़े, वंशी मधुर बजाएं,
तेरे प्रेम के समर्पण पर, बलिहारी सारा संसार।

शुभ तिथि है राधाष्टमी गाओ मिल मंगल गान,
प्रकट हुई है आज श्री राधिके वे करुणा की खान,
पूर्ण शक्ति, भक्ति, आस्था की बहती अविरल धार,
ऋषि, मुनि, के हृदय विराजती राधा रानी महान।

मन के मंदिर में बैठी जो, वो मूरत सबसे प्यारी है,
कृष्ण अगर हैं पूर्ण ब्रह्म तो, राधा शक्ति न्यारी है,
मुरली की हर तान में, राधा का परिवेश है,
वृषभानु की दुलारी, सुंदर राधा आज अवतारी है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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