राधाष्टमी
विधा- कविता
शीर्षक- राधाष्टमी
ब्रज मंडल की अविश्वतरी देवी राधिके,
कुंज-कुंज में गूँज उठी, राधा-राधा पुकार,
कदंब तले श्याम खड़े, वंशी मधुर बजाएं,
तेरे प्रेम के समर्पण पर, बलिहारी सारा संसार।
शुभ तिथि है राधाष्टमी गाओ मिल मंगल गान,
प्रकट हुई है आज श्री राधिके वे करुणा की खान,
पूर्ण शक्ति, भक्ति, आस्था की बहती अविरल धार,
ऋषि, मुनि, के हृदय विराजती राधा रानी महान।
मन के मंदिर में बैठी जो, वो मूरत सबसे प्यारी है,
कृष्ण अगर हैं पूर्ण ब्रह्म तो, राधा शक्ति न्यारी है,
मुरली की हर तान में, राधा का परिवेश है,
वृषभानु की दुलारी, सुंदर राधा आज अवतारी है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
