कविता

नारी सम्मान

जिस घर में नारी का सम्मान होता है,
वहीं प्रेम का पावन स्थान होता है।
जहाँ उसकी मुस्कान बनी रहे सदा,
वहीं सुख-समृद्धि का विधान होता है।

जिस आँगन में नारी निर्भय रहती है,
वहाँ हर खुशियों की कली खिलती है।
उसके आँचल में संस्कार पलते हैं,
उसकी दुआ से तकदीर सँवरती है।

जहाँ नारी के आँसू अनदेखे होते हैं,
वहाँ रिश्ते धीरे-धीरे खोखले होते हैं।
सम्मान मिटे तो संस्कार भी मिटते हैं,
फिर घर के दीप स्वयं बुझने लगते हैं।

नारी केवल घर की शोभा नहीं होती,
वह परिवार की आत्मा होती है।
उसके सम्मान से वंश सँवरता है,
उसकी ममता से पीढ़ी निखरती है।

इसलिए नारी को सम्मान दीजिए,
उसके अधिकारों को स्थान दीजिए।
किशन जिस घर में नारी का मान सुरक्षित रहे,
उस कुल को सदा उन्नति का वरदान दीजिए।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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