ग़ज़ल
प्यार करते रहे हम तो जी-जान से।
आज आगे बढ़े देख ले शान से।
झूमता ही रहा मन उन्हीं के लिए।
था रखा ही कदम आज सम्मान से।।
देख दुनिया बसाई यही ख़्वाब था।
आज आगोश में आ गये मान से।।
आज छवि ही उतरती कहे आँख ही।
आज ख़्यालों में बसते हैं अरमान से।।
प्रेम हक़ है हमारा देना हमें।
माँगते हैं इसे आज भगवान से।।
— रवि रश्मि ‘अनुभूति’
