Author: डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

सामाजिक

आंतरिक संप्रभुता का अमोघ अस्त्र, विकारों के कोलाहल में शांत रहने की कला

​आज का मानव विकास और तकनीक के शिख़र पर बैठकर भी भीतर से अत्यंत अशांत और बेचैन है। हम एक

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सामाजिक

जादू टोना,डर और अज्ञानता का कॉरपोरेट व्यापार

इतिहास, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के मामले में हमारा समाज जितना प्राचीन और समृद्ध रहा है, दुर्भाग्य से यहाँ अंधविश्वास,

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भाषा-साहित्य

साहित्य की साधना में ‘स्व’ से ‘सर्व’ की ओर

​साहित्य केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज की चेतना का जीवंत दस्तावेज़ होता है। वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति

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