अपनी वाह-वाह
दूसरों की आज करता है कौन परवाह,धुंआधार बस बढ़ती रही जा रही चाह,दिलों में नहीं है उजाला अहम है बसा,सभी
Read Moreदूसरों की आज करता है कौन परवाह,धुंआधार बस बढ़ती रही जा रही चाह,दिलों में नहीं है उजाला अहम है बसा,सभी
Read Moreजाति-पाति व धर्म के नाम पर लड़ाना कितना आसान,कमजोर हुई भारत की रीढ़ खो रही “आनंद” मुस्कान । टूटा है
Read Moreसत्य के पथ पर हो अग्रसर,बढ़े जा तू कर्मों के रथ पर,अपने सपनों को दे विस्तार,हौसलों की बुलंद उड़ान भर
Read Moreस्वतंत्रता से गणतंत्र तक का यह सफ़र बहुत शानदार,संविधान हमारा देता है सबको एक समान अधिकार,समूचे विश्व का सबसे बड़ा
Read Moreमोह मद का धागा जुड़ा है मानव मन सेये मन तो है बड़ा चंचल लोभी मतवाला,हे मॉं शारदा करूॅं मैं
Read Moreस्वागत में बसंत के प्रकृति ने की है मनोरम तैयारी,आ गई ऋतुराज बसंत की “आनंद” खुशनुमा सवारी,फिज़ाओं में घुली ख़ुशबू
Read Moreमाघी मौनी अमावस्या की तिथि विशेषकर है पितरों को समर्पित,पितरों को इस दिन तर्पण से प्रसन्न कर आशीर्वाद करें अर्जित,गंगा
Read Moreआया है पर्व अति विशेष लेकर “आनंद” शुभकामनाएं,आदित्य का मकर राशि में हुआ प्रवेश बढ़ी संभावनाएं,झूमेगी फसलें लहलहाएगें खेत भास्कर
Read Moreधुंध की चादर ने डाल रखा है डेरा,कड़ाके की ठंडी और घना है कोहरा,हाथ को हाथ भी नहीं दिखता है
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