कैसा ये जीवन
कैसा ये जीवनकि इसमें संतोष नहींईश्वर ने हाथ दिएहृदय दिया, पेट दियादी सुंदर आंखेंपरंतु हुजूर को संतोष कहां? मैं सोचता
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Read Moreमैं जिसे हृदय में धड़काता हूंवो कविता तुम्हें सुनाता हूंहंगामा काटना मेरा मकसद नहींबस सच को सच तक पहुंचाना चाहता
Read Moreदर्द अपना छिपाकरहम मुस्कुराते रहेथके-थके थे पांवहम निरन्तर चलते रहेजमाने को आजमाना छोड़हम स्वयं को आजमाते रहे । दर्द अपना
Read Moreआदमी आदमी नहीं रहाबहुत जहरीला हो गया है ।रावण- कंस दिनदहाड़े करते अट्टहास … राम-कृष्ण बैठे मंदिरों मेंउचित समय की
Read Moreसमय बड़ा बलवानसमय पर राजाबन जाता है रंकऔर समय पररंक बन जाता है राजा । समय बड़ा बलवानव्यर्थ इसे मत
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