पाप का घड़ा
पाप का घड़ा, जब भर जाता हैबड़े से बड़ा फिर, पकड़ा जाता हैकोई भी तर्क, काम नही करेगानाटक से काम,
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Read Moreचुनावों का बिगुल, बज चुका हैजंग का मैदान, अब सज चुका हैजनता को रिझाने,का दौर जारी हैदेखते हैं इस बार
Read Moreअंडमान का, सेल्युलर जेलजिनसे बन गया, अब तपोवन हैऐसे वीर सावरकर , जी को हमारा शत् शत् , नमन है
Read Moreजब न आकांक्षाएं, हिलोरे मारेंऔर न कुछ पाना, ही हो जरूरीफिर हम क्यों, हां में हां मिलाएऐसी भला है, क्या
Read Moreपांच सौ वर्षों से, भी अधिक काइंतजार आखिर , खत्म हुआअयोध्या सज गयी, दुल्हन जैसीश्री राम जी का, आगमन हुआ।।
Read Moreयूं ही नही कोई, अटल बन सकता ग्वालियर की, पुण्य धरा परएक अटल सितारा, उदित हुआजन-मानस पर, अमिट छाप छोड़ीबार
Read More-साठ का आंकड़ा, पार क्या किया लगता है जैसे, नये पंख लग गये नयी नयी विधाओं,से हुआ सामना खुशियों से
Read Moreमुंबई की लोकल, ट्रेन का सफर एकदम , है निराला ।। क्या अंदर, क्या बाहर सब जगह, भारी भीड़ है
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