वेद नहीं, वेदना पढ़ो
वेदों की चर्चा बहुत, मंचों पर दिन-रात।भूखे की पीड़ा पढ़ो, समझो हुआ प्रभात॥ ग्रंथों से ऊँची हुई, भाषण की हर
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Read Moreआज जब हम पूजा, परंपरा और श्रद्धा की बात करते हैं, तो अक्सर भूल जाते हैं कि धर्म का मूल
Read Moreभारत के ग्रामीण समाज में महिला सशक्तिकरण, पोषण और स्वास्थ्य काफी हद तक आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता
Read Moreकवि ही मंच है,कवि ही माइक,कवि ही तालियाँ,कवि ही श्रोता। कवि ही किताब ख़रीदता,कवि ही कवि को बुलाता,और सम्मान—आपस में
Read Moreभारत के गणतंत्र की, ये कैसी है शान।भूखे को रोटी नहीं, बेघर को पहचान॥ सब धर्मों के मान की, बात
Read Moreदो हज़ार छब्बीस का गणतंत्र दिवस नज़दीक आते ही देशभक्ति का उन्माद छा जाता है। राजपथ पर भव्य परेड, ड्रोन
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Read Moreआज विश्व बालिका दिवस मनाया जा रहा है। देश और दुनिया में इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ और प्रतीकात्मक
Read Moreकुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर लिखना आसान नहीं होता। वे केवल शब्दों की नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और
Read Moreलोकतंत्र में सत्ता का सबसे संवेदनशील और प्रभावशाली चेहरा पुलिस व्यवस्था होती है। पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था
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