Author: *डॉ. प्रियंका सौरभ

समाचार

‘आखर थोरे’ में डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ की पाँच लघुकथाएँ शामिल

हिसार की प्रख्यात दैनिक संपादकीय लेखिका एवं राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’ को हिंदी लघुकथा के प्रतिष्ठित संग्रह

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सामाजिक

रिश्तों में संतुलन का संकट : भावनाओं के शोषण की सामाजिक सच्चाई

मनुष्य का जीवन रिश्तों के ताने-बाने से ही आकार लेता है। परिवार, मित्रता, प्रेम, सहयोग और सामाजिक संबंध—ये सभी हमारे

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सामाजिक

माँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर 

भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋतु परिवर्तन का लोकउत्सव: लोहड़ी और नई ऋतु की दस्तक

भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं।

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शिक्षा एवं व्यवसाय

विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ

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