बीएसएनएल के बाद अब सरकारी स्कूलों की बारी
जब भी कोई सरकार राष्ट्रहित की बातें करती है, तो नागरिकों को यह समझना चाहिए कि इन कथित राष्ट्रहितों से
Read Moreजब भी कोई सरकार राष्ट्रहित की बातें करती है, तो नागरिकों को यह समझना चाहिए कि इन कथित राष्ट्रहितों से
Read Moreज्योत जली पर दीप बुझा क्यों,आस्था थी या भ्रम छिपा क्यों? कंधे पर कांवड़, माथे तिलक,पग पग पर था पाखंड
Read Moreकभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी
Read Moreविरह-वृष्टि में भीग रही,पलकों की सूनी हरियाली।झूले की टूटी डोरी-सी,डोलती जीवन की लाचारी। मेंहदी सूखी, रंग न आए,पी की पायल
Read Moreहरियाली तीज केवल श्रृंगार, झूला और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय स्त्री के आत्मबल, प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव
Read Moreराजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से मासूम बच्चों की जान चली गई। खबर आते ही दिल दहल
Read Moreप्रियंका सौरभ की लघुकथाएं — प्रियंका सौरभ
Read More2006 के मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों में लगभग 189 लोगों की जान गई। लगभग 19 वर्षों तक चले मुकदमे के
Read Moreभारत आज संसार का सबसे युवा देश है। हमारी जनसंख्या का लगभग पैंसठ प्रतिशत भाग पैंतीस वर्ष से कम आयु
Read Moreभारत में शिक्षा संस्थान अब केवल डिग्रियों की फैक्ट्री बनते जा रहे हैं, जहां बच्चों की संभावनाएं और संवेदनाएं दोनों
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