नारी विषयक 12 हिंदी कविताएँ
1) स्त्रियाँ जो द्रौपदी नहीं बनना चाहतीं वे स्त्रियाँअब चीरहरण नहीं चाहतीं,ना सभा की नपुंसक दृष्टि,ना कृष्ण का चमत्कारी वस्त्र-प्रदर्शन।वे
Read More1) स्त्रियाँ जो द्रौपदी नहीं बनना चाहतीं वे स्त्रियाँअब चीरहरण नहीं चाहतीं,ना सभा की नपुंसक दृष्टि,ना कृष्ण का चमत्कारी वस्त्र-प्रदर्शन।वे
Read Moreमिट्टी की महक से है उसकी आराधना,खेत-खलिहान में वो करता नित नमन।धूप-छाँव में जो तपे, जो झूके न कभी,कृषक है
Read More“लिपट के रोये हैं बेटियों से अपनी हालत पे, जो कहते थे विरासत के लिये बेटा जरूरी है…” यह शेर
Read Moreमैं वह परछाई हूँ, जो छिप न पाई,मन के आँगन में घर कर गई।जहाँ चालों की परतें बिछी थीं,वहाँ मेरा
Read Moreवे जब चलीं तो हाथ में कलम थी,पर राह में कांटे, पत्थर, हर कदम थी।सच की तलाश में निकलीं जो
Read Moreछोटे-छोटे हाथों में, अब गेंद नहीं, किताब नहीं,चाकू है, गुस्सा है, आंखों में अब ख्वाब नहीं।न शरारत की हँसी बची,
Read Moreस्कूली छात्रों द्वारा चाकू से हमले की घटनाएं बता रही हैं कि बच्चों की मासूमियत में अब गुस्सा, हिंसा और
Read Moreशहरों की भीड़ में रहते हुए हम जैसे संवेदना शून्य होते चले जाते हैं। वहां सुबह मोबाइल अलार्म से होती
Read Moreमहाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव के प्रतीक थे। जब सारे राजपूत मुग़ल दरबार में झुक गए,
Read Moreआखिरकार छोड़कर तो सब कुछ यहीं जाना है। ऐसे में यदि किसी जरूरतमंद अपने की सहायता कर दी जाए, तो
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