डिजिटल दासता की डायरी
न था मुक़दमा, न कोई फ़रमान,किया व्हाट्सएप ने अकाउंट निष्क्रिय बेजुबान।जैसे राजा बोले – “चुप रहो!”और प्रजा हो जाए संतान-सा
Read Moreन था मुक़दमा, न कोई फ़रमान,किया व्हाट्सएप ने अकाउंट निष्क्रिय बेजुबान।जैसे राजा बोले – “चुप रहो!”और प्रजा हो जाए संतान-सा
Read Moreजब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और
Read Moreसमाज में अब बेटी की निगरानी नहीं, दादी और सास की होती है। तकनीक और आज़ादी के इस युग में
Read Moreहिसार/ भिवानी/फरीदाबाद, हरियाणा | 25 मई 2025: देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह में
Read Moreभारतीय लोकतंत्र का मूल मंत्र है – समान अवसर। लेकिन जब अवसरों की तुलना में विशेष सुविधाएं या बोनस अंक
Read Moreऐसे दौर में हैं, जहांमुस्कानें भी मुखौटे हो गईं,चुप्पियाँ भी साजिशें बुनने लगीं,जहां दोस्ती का रंग अब,पल भर में ज़हर
Read Moreरिश्ते – वो मौन स्पंदन,जो न फासलों से बंधते हैं,न ही समय की सीमाओं से,ये तो दिल की उस गहराई
Read Moreबाहर से हमला हो तो खून खौले,यहाँ तो घर के भीतर चाकू चले।सैनिक सरहद पे जान दे आया,पीछे से कोई
Read Moreटेक्नोलॉजी का यह दौर,जहाँ रिश्ते सिमटते जा रहे हैं,जहाँ उंगलियों की सरसराहट मेंममता की गर्माहट खो रही है,जहाँ नज़रों की
Read Moreमैंने देखा है,उन पत्तों को,जो आंधी में कांपते हैं,जिनकी जड़ें मिट्टी में हैं,पर मन खुली हवा का सपना देखता है।
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