बचपन को अख़बारों में जगह क्यों नहीं?
रविवार की सुबह बेटे प्रज्ञान को गोद में लेकर अख़बार से कोई रोचक बाल-कहानी पढ़ाने की इच्छा अधूरी रह गई।
Read Moreरविवार की सुबह बेटे प्रज्ञान को गोद में लेकर अख़बार से कोई रोचक बाल-कहानी पढ़ाने की इच्छा अधूरी रह गई।
Read Moreसावन को आने दो, बूँदों को गाने दो,मन के सूने कोनों में हरियाली छाने दो। भीगी धूप में खिलती मुस्कानें
Read Moreअब नहीं चाहती मैंतारों से सजी प्रशंसा,न लहरों की वंदना,न बाहरी स्वर का मधुर झूठ। मुझे तो चाहिए —वो मौन
Read Moreकृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज नई रचनात्मकता का माध्यम बन चुकी है, पर यह बहस का विषय है कि क्या यह
Read Moreमायका छूटा, गोदी छूटी,भाई की कंधी बोली रूठी,सास-बहू की लोरी गूंजी,बेटी की दुनिया पूरी झूठी। माथे की बिंदी मांग सजाए,थक
Read Moreआज का समाज एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है जहाँ एक तरफ़ तकनीकी प्रगति ने जीवन को सहज
Read Moreशादी के दिन रेखा को उसके मायके से एक बड़ी सी ट्रॉली मिली — बर्तन, गहने, कपड़े। सास ने कहा — “अच्छा है, कुछ बोझ तो
Read Moreसुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक रसोई में लगी रहती थी। उसकी दुनिया वहीं थी — मसालों के डिब्बे, जलते पराठे और भीगी आँखें। एक
Read Moreरश्मि हर शाम बालकनी में बैठकर एक चिट्ठी लिखती थी — अपने पुराने प्रेमी को। शादी के बाद उसका वो हिस्सा कहीं
Read Moreकमला का आंचल कभी दूध से भीगा रहता था, कभी आँसुओं से। हर बार जब पति गुस्से में हाथ उठाते, वह चुप
Read More