स्कूल के बाहर खड़ी आधी आबादी : जब बेटियाँ बीच रास्ते लौट आती हैं
भारत में लड़कियों की स्कूली शिक्षा की कहानी आज़ादी के बाद के विकास‑वृत्तांत की सबसे जटिल और मार्मिक कड़ी है।
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Read Moreमिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह‑सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी‑सी लड़की आज फिर घर की
Read Moreछोटी‑सी वो लड़की है,मन में स्कूल बसाए,लेकिन घर के कामों ने,उसके पंख कतराए। सुबह‑सुबह वो बैग उठाकरदहलीज़ पे रुक जाती
Read Moreमैंने वर्तमान की देहरी परअपने थके सपने रख दिए,पल ने चुपचापमेरी आँखों से बात की।भविष्य दूरधुँध में लिपटा खड़ा रहा,उसके
Read Moreरिया को बचपन से ही छायाचित्र लेने का शौक था। जब उसके हमउम्र बच्चे खिलौनों, खेलों और अपने छोटे-छोटे झगड़ों
Read Moreभारत की राजनीति में विश्वास केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जन-धारणाओं और नीतिगत परिणामों का प्रतिफल है। ‘विकसित भारत–जी राम
Read Moreहाल ही में 10 वर्षीय एक बच्चे की अचानक मृत्यु से जुड़ा समाचार केवल एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि
Read Moreपर्यावरण संरक्षण की बहस अक्सर एक सुविधाजनक दिशा में मोड़ दी जाती है—सरकारें नीतियाँ नहीं बनातीं, मंत्रालय निष्क्रिय हैं, क़ानून
Read Moreआज जिस दुनिया में हर उपलब्धि को फ़्लैश लाइट, कैमरा और सोशल मीडिया की चमक से मापा जाता है, वहाँ
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