दोहे : पागल बनते लोग
पागलपन में हो गयी, वाणी भी स्वच्छन्द। लेकिन इसमें भी कहीं, होगा कुछ आनन्द।। — पागलपन में सभी कुछ, होता
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Read Moreआदमी के प्यार को, रोता रहा है आदमी। आदमी के भार को, ढोता रहा है आदमी।। आदमी का विश्व में,
Read Moreकहाँ चले ओ बन्दर मामा, मामी जी को साथ लिए। इतने सुन्दर वस्त्र आपको, किसने हैं उपहार किये।। हमको ये
Read Moreआज नभ पर बादलों का है ठिकाना। हो गया अपने यहाँ मौसम सुहाना।। कल तलक लू चल रही थी,
Read Moreमीठे सुर में गाकर कोयल, क्यों तुम समय गँवाती हो? कौन सुनेगा सरगम का सुर, किसको गीत सुनाती हो? बाज
Read Moreजब गरमी की ऋतु आती है! लू तन-मन को झुलसाती है!! तब आता तरबूज सुहाना! ठण्डक देता इसको खाना!! यह
Read Moreदोहागीत — मतलब की है दोस्ती, मतलब का है प्यार। मतलब के ही वास्ते, होती है मनुहार।। दुनियाभर में प्यार
Read Moreजगदम्बा के रूप में, रहती है हर ठाँव। माँ के आँचल में सदा, होती सुख की छाँव।१। ममता का जिसकी
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