नेता प्रतिपक्ष हो गंभीर
केंद्रीय मंत्री को ‘नेता प्रतिपक्ष’ ने कहा गद्दार,संसद भवन परिसर में सही नहीं हैं व्यवहार।अपने दल में रहें तो सब
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Read Moreदेश में पेश हो चुका है आम केंद्रीय बजट,हर बार ‘राजनीतिक प्रतिक्रिया’ हैं विकट।कोई भी दल हटकर क्यों? नहीं बोल
Read Moreजिधर भी देखिए सब अपने आप में गुम हैं,उन्हें समझ ना आता स्वयं पे होता ज़ूल्म है।जिंदगी में कभी इतने
Read Moreआकर गई हैं जनवरी आएगा अगस्त,नहीं है कोई सुखी, नहीं है कोई मस्त।क्यों? नहीं ये किसी का चेहरा खिला,अपनों से
Read Moreवर्तमान में मिल रहा हैं काग़ज़ी सम्मान,इससे चमक खोता वास्तविक योगदान।आज ये राष्ट्र के आत्ममंथन का अवसर,प्रशंसा-पत्रों को पाने के
Read Moreसोच रहा हूँ क्यों ठिठके हैं सबके कदम?सैकड़ो लोग पुलिस-फायरकर्मियों का दम।क्यों? नहीं बचा पाए एक युवराज की जान,मॉल बनाने
Read Moreबहुत कुछ बोलती हैं स्टेटस की तस्वीरें,नहीं है जुबान उनकी खेंच देती लकीरें।वो अनजाने ही खूब खोल देती है पोल,बिना
Read Moreआईए जिन्दगी का कुछ हिसाब करते हैं,पल-पल बीत गया उसकी बात करते हैं।कोई भी नया मिलें तो मुलाकात करते हैं,यूं
Read Moreशांति में ‘समझ और समझ’ में है समाधान,छोटी-छोटी बातें देती बड़े तनाव, व्यवधान।जीवन में बाँटों सुख-दुःख हो आदान-प्रदान,दुआ करों सबके
Read Moreदेश-विदेश में ऐसी हो रही ‘दादागिरी’,ना जाने किस-किसकी है बुद्धि फिरी।ये विदेश में देखो राष्ट्रपति को ले उड़ी,क्योंकि तेल पर
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