लिव इन में होगी निराशा
जब रिश्तों की राहों में, सवाल कई उठते हैं,दिल की खामोशी में, कुछ जवाब छुपते हैं।साथ चलना अगर दोनों की
Read Moreजब रिश्तों की राहों में, सवाल कई उठते हैं,दिल की खामोशी में, कुछ जवाब छुपते हैं।साथ चलना अगर दोनों की
Read Moreअंधेरे की चादर ओढ़े, बरसों से सोया हुआ था गाँव,ना दीपक, ना उजियारा, जंगल, पगडंडी और ठांव। आज़ादी के 78
Read Moreबंगाल की ‘धरती’ आज कुछ और कहती है,सदियों की ‘चुप्पी’ जैसे अब टूटती रहती है।इस हवा में घुल रहीं है
Read More‘महिला आरक्षण’ का सपना फिर अधूरा रह गया,संसद के गलियारों में सच जल की तरह बह गया।बड़ी-बड़ी बातें करने वाले,
Read Moreखामोश थीं दीवारें, पर ‘दर्द’ चीख रहा था,ये इंसान ही इंसान को नीचे गिरा रहा था। क्यों? स्त्री जननांग से
Read Moreधुएँ में घुलती चीखें व सड़कों पर बिखरा शोर,अब मुट्ठियाँ उठी हुई हैं और आँखों में है जोर।पसीने की हर
Read Moreछत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में मालती अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। पास में खड़ी
Read Moreआज चेहरे से वो खुशी गायब थी,जो तूने साथ में रहकर कमाई थी।कितने ‘हँसी’ थे वो छोटे-छोटे पल,खुशियों को बाँटकर
Read Moreपेट्रोल पंप पर खड़े हुए आंखों में “भरोसा” भर लाते हैं,मीटर पर ‘जीरो’ चमकते ही हम चैन की सांसें पाते
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