ग़ज़ल : हम गुल नहीं गुलदान के तो क्या हुआ
हम गुल नहीं गुलदान के तो क्या हुआ। चर्चे नहीं सम्मान के तो क्या हुआ॥ हम अपने घरौंदे के बादशाह
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Read Moreहम नेकियाँ करके भी गुनहग़ार हो गये। करते रहे दगा वो फिर भी प्यार हो गये॥ बनाते हैं रिश्ते अब
Read Moreचढ़ने लगी हैं हसरते परवान रफ्ता रफ्ता। हम हो रहे हैं जानेमन की जान रफ्ता रफ्ता वो मेरी चाहतों का
Read Moreदिल में क्यूं है इतना मलाल मत पूछ। जिनके उत्तर नही वो सवाल मत पूछ॥ अब जहां हूं जैसा हूं
Read Moreदिल में लगने लगी है लगन क्या करे सांसों में पल रही है जलन क्या करे। नीद आती नही सोचकर
Read Moreतेरे बिस्तर की हर सरवट हकीकत खोल जाती है बदल कर कर करवटें आंखों में सारी रात जाती है। तू
Read Moreहमने दिल को बनया है घर आपका, बांहों के दर खुले हैं। हम तुम्हारे हुए तुम हमारे हुए, इस ज़हां
Read Moreपपीहा मन प्यासा ही तरसा। सब का सावन आया मेरा मेघा ना बरसा॥ पपीहा मन प्यासा ही तरसा….. सहरा की
Read Moreदामन में मेरे आग लगाता है कौन। अर्थीयां रिश्तों की उठाता है कौन॥ उजडे सिदूंर पूछ रहे हैं बताओ तो।
Read Moreहर कदम चुनौती है ईम्तिहान है ज़िंदगी। कौन कहता है कि आसान है ज़िदगी॥ एक तो ऐसे ही कुछ कम
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