मीरा का खुद से वार्तालाप
तू कहती तेरे गिरधर गोपाल,यह कैसा मायाजाल?नागर को तेरा कहाँ है भान,देख जरा तू अपना हाल। राणा को कर दिया
Read Moreतू कहती तेरे गिरधर गोपाल,यह कैसा मायाजाल?नागर को तेरा कहाँ है भान,देख जरा तू अपना हाल। राणा को कर दिया
Read Moreआज एक खयाल आयाऔर दिल को यूँ भा गया,कि हम अक्सर दूसरों की नज़रों मेंअपनी क़ीमत ढूँढ़ते हैं,उनके आँकलन में
Read Moreमेरे इन प्यासी पलकों परख्वाब सुनहरे किसके हैं?क्या वही हैं, जिनकी ख़ातिरहम रात-रात भर सिसके हैं? एक क्षण कभी ऐसा
Read Moreपत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल सभी का जाने हैं,जब तक डाली से जुड़े थे छाँव सरीखे माने हैं। अब जो छूटे समय
Read Moreजो आ जाऊँ तो मूक उधरजाने को कह दूँ तो बेखबर,कैसे समझूँ जज्बात प्रियकिस विध लूँ तेरी थाह प्रिय इठलाती
Read Moreवो मेरा पुराना घर,थे बेपरवाह,नहीं था डर।सालों बाद जब पड़े कदम,तैर गए वो सारे मंजर। आने लगी हँसी की आवाज़ें,कुछ
Read Moreजमशेदपुर, 18 जुलाई झारखंड के साहित्यिक जगत के लिए यह गौरव का क्षण है जब जमशेदपुर के तीन साहित्य साधको
Read Moreउन सभी को प्रणाम जिन्होंने हमेशा कुछ न कुछ सिखाया, गलतियाँ सुधारी 🙏🏽🙏🏽 हे गुरुवर हम आपका, करें सदा सम्मान।मिले
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