स्पर्श
याद आती है वो छुवन,जब बादल ने धरा को चूमा था,लहलहा उठी थी धरती,सिहर सी गयी थी,जब हवाओं ने उसे
Read Moreबहुत जी करता हैजी लूँ हर वह क्षण,जब नटनागर रास रचाते थे,मधुर बंसी की तान परसंसार को मोहित कर जाते
Read Moreअसंभव जिनके शब्दकोष में कभी आया ही नहीं,छिहत्तरवें में भी जोश उनका घटा ही नहीं।सिंह-गर्जना सी दहाड़ सुन दुश्मन हो
Read Moreवाकई बड़ी विचित्र होती है माँकितनी भी तबीयत खराब रहे,भूलती नहीं जितिया का व्रत करना,मड़ुवा नोनी सतपुतिया झिंगी ओठगन,रहकर निर्जला,
Read Moreवेदने तू यह बता देक्यों हृदय है श्रांत तेराचिर विरह की स्वामिनी तूक्यों है मन उद्भ्रांत तेरा।बस क्षणिक भर ही
Read Moreजी करता है जाने तुझको, कैसी थी तुम बचपन में।चञ्चल थी या चुप चुप रहती सच कह क्या अंतर्मन में।
Read Moreएक छोटा-सा संदूक पीतल का, पर चमकता सोने-सा।नानाजी-नानीजी ने माँ को दिया थाउनकी शादी के समय आशीष, परंपरा और अपनापन
Read Moreना जाने क्यों, जब भी हरसिंगार की सुवास मेरी साँसों से टकराती है, मेरा मन खिंचा चला जाता है। यह
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