व्यंग्य : नाजायज़ औलाद
इन दिनों मुझे हर व्यक्ति में कोरोना दिखता है। लगता है कोरोना ब्रह्म है जिसका वास हर जीव में है।
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Read Moreआज मुझे उन लोगों पर तरस आ रहा है जो मेरे मद्यपान से रुष्ठ रहते थे। मूर्ख कहीं के। वे
Read Moreउनकी गिनती संसार के शूर-वीर जंतुओं की प्रजाति में होती थी। सड़क पर पुलिस के सामने चौराहे के यातायात सिग्नल
Read Moreदानवता का नाच देखिए,आस्तीन में साँप देखिएअपनो का सिर काटनेवाले,जिंदा जिन्न-पिशाच देखिए। ये मजहब की बाँध के पट्टी,आँखों कोअंधा करते
Read Moreशासन के संग अनुशासन को अस्त्र बनायेंकाल करोना को सब मिलकर आज हरायें है ऐसा वह कौन धुरंथर, जो ना
Read Moreअंधकार था जब जन-मन में, घोर तमस था सकल भुवन में तब मैंने भी रीत निभायी, देश-भक्ति की ज्योत जगायी!
Read Moreगहन तिमिर संग सूनी राहें काल खड़ा फैलाकर बाँहें नयी इबारत गढ़ना होगा आज मौत से लड़ना होगा। मृत्युदेव ने
Read Moreयुद्ध लड़े ना जाते केवल, सरहद-रण मैदानों में युद्ध लड़े ना जाते हरदम, जल-थल औ’ असमानों में कभी-कभी घर के
Read Moreवासंती मौसम का कैसा, उजड़ गया सिंगार? बागों में खिले फूल लाश के, कहीं बिछी अंगार! चीख रही फागुन में
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