ग़ज़ल
ये मेरा दिल है, तेरे शहर का बाज़ार नहीं प्यार करता है फ़क़त, प्यार का व्यापार नहीं नातवां हूँ मैं
Read Moreआओ हम भारत को इस धरती का स्वर्ग बना डालें प्यार-मोहब्बत के फूलों से बग़िया ये महका डालें अद्भुत
Read Moreगुनगुनाते हुए आंचल की हवा दे मुझको उंगलियां फेर के बालों में, सुला दे मुझको हर एक पल तू मेरे
Read Moreसम्भल कर तोड़ना, दिल एक नाज़ुक फूल होता है फ़िज़ा में रूह से निकली हुई ख़ुशबू पिरोता है ये
Read Moreहे नटवर, लीलाधारी अब आओ कृष्णमुरारी धरती संतप्त तुम्हारी आ जाओ हे गिरधारी मार-काट,बस लूट-पाट, अब ये दुनिया हैवान
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