आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 37)
दो नये अधिकारी – विकास और प्रेरणा हमारे केन्द्र में सन् 2007 में दो नये अधिकारी आये। वे थे- श्री
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Read Moreयोग कक्षायें जब मुझे पंचकूला में रहते हुए लगभग दो साल हो गये थे, तब हमारी सेक्टर 12-ए की शाखा
Read Moreडा. भाईसाहब की बीमारी हमारे बड़े भाईसाहब डा. राममूर्ति सिंघल का स्वास्थ्य हम सभी भाइयों में सबसे अच्छा माना जाता
Read Moreसूखी या गीली दोनों तरह की खाँसी का कारण है पुराना क़ब्ज़ और फेंफडों में विकार एकत्र होना। इनको दूर
Read Moreमलेशिया-सिंगापुर-श्रीलंका भ्रमण (जारी…) निर्धारित समय पर हम सिंगापुर पहुँच गये। वहाँ हमारा होटल लिटिल इंडिया नामक जगह पर मुस्तफा बिल्ंिडग
Read Moreकई बार हमें भोजन करने के बाद अपना पेट भारी लगता है। ऐसा प्राय: तब होता है जब हम गरिष्ठ
Read Moreमलेशिया-सिंगापुर-श्रीलंका भ्रमण (जारी…) हम एक साथ ही एक ही बड़ी टैक्सी में बैठकर एक होटल तक आये, जहाँ कमरा मिला।
Read Moreचुघ साहब और नितिन राजुरकर अभी तक हम अपने संस्थान का हिसाब-किताब स्वयं रखा करते थे। परन्तु हम सभी कम्प्यूटर
Read Moreकसौली पिंजौर से थोड़ी दूर कालका से आगे सोलन जिले में कसौली नामक प्रसिद्ध पहाड़ी स्थान है। मेरी बहुत इच्छा
Read Moreपिछले लेख में मैंने बताया था तनावग्रस्त रहने से कोई समस्या हल नहीं होती, बल्कि नई समस्याएं पैदा हो जाती
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