लघुकथा – रक्षा-बंधन
आज रक्षा-बंधन का अवकाश है । नौकरीपेशा रहम़त की भी छुट्टी थी । अपने दैनिक कार्यों से निवृत होकर दोपहर
Read Moreआज रक्षा-बंधन का अवकाश है । नौकरीपेशा रहम़त की भी छुट्टी थी । अपने दैनिक कार्यों से निवृत होकर दोपहर
Read Moreबहुत दिनों से जूझ रही थी वो जालिम आखिर सफल हो ही गई अपने मकसद में और ले गयी वो
Read Moreआज पन्द्रह अगस्त है । शहर के खेल मैदान में पूरा शहर ‘स्वतंत्रता-दिवस’ मनाने जा रहा है । सुबह का
Read Moreभाव चुराते ताव चुराते साहित्य समुंदर पार करन को वो शब्दों की नाव चुराते हाथ- सफाई ऐसी करते अच्छे-अच्छे गच्चा खाते सूरज-चंदा छिपे ओट
Read Moreलोग कहते हैं कि कलम हाथ से चलती मैं कहता, कलम हाथ से नहीं, दिम़ाग से चलती है सोच से
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