प्रभात नई
झिलमिल झिलमिल तारें डूबे धरा हुई प्रभात नई दूर क्षितिज अरुणाई फैली लगती जैसे बात नई होने लगा प्रभास रह रह कल-कल स्वर
Read Moreहम भी हिन्दी तुम भी हिन्दी हिन्दी अपनी पहचान है हिन्दी भाषा हिन्दी अभिलाषा हिन्दी से हिन्दुस्तान है हिन्दी भाने
Read Moreउड़ान उसके संग मैंने भी भरी थी पंख मैंने भी फड़फड़ाये उसके संग पर वो मंजिल पा गया मैं रह
Read Moreयद्यपि कई बीमारियों का घर हैं मेरे दोस्त का शरीर जाँच में आज सामने आया कि वो झूठ भी बोलता
Read Moreना किस्मत ना कोई, भाग्य हुआ करता है कर्मो का प्रतिफल, परिणाम हुआ करता है हर पल निज कर्मो की,
Read Moreसूरज का कोप गर्मी बन बरस रहा धरती का आँचल पानी बिन तरस रहा वक्र हवा सर्पिणी सी
Read Moreनेताजी ने एक आवश्यक बैठक में अपने सभी कार्यकर्ताओं को बुलाया और कहा- वैसे आप सबको पता होगा ही फिर
Read Moreगांधी की अहिंसा शास्त्री की सरलता किताबों में रह गई है सिर्फ कहानी राजा और प्रजा भटके हैं दोंनो कर
Read Moreये समय बड़ा ही धावक है सदा दौड़ता रहता है दिन रातों का आना-जाना, घड़ी-पल से तोलता रहता है वो
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