नागमणि — एक रहस्य ( भाग — ६ )
अब गुरूजी ने वह आटे से बनाया हुआ दीया प्रज्वलित कर दिया और उसके ठीक निचे की सीढ़ी पर जहाँ
Read Moreअब गुरूजी ने वह आटे से बनाया हुआ दीया प्रज्वलित कर दिया और उसके ठीक निचे की सीढ़ी पर जहाँ
Read Moreगुरूजी की बात अब मेरे समझ में आ रही थी । ‘ वाकई रात के अँधेरे में हम वहां मंदिर
Read Moreदुसरे दिन गुरूजी निर्धारित समय पर हमारे घर पर आ गए । घर पर जलपान वगैरह कराकर हम साथ में
Read Moreउस दिन अमरनाथ जी से हमारी मुलाकात संक्षिप्त ही रही थी । चाय नाश्ता वगैरह करके उस दिन सभी चले
Read Moreएक पल को मैंने अपनी हथेली पर रखा वह मणि देखा और अगले ही पल उस आदिवासी के कहे मुताबिक
Read Moreबात लगभग 1993 के आखिरी दिनों की है । एक शाम मैं अपने एक मित्र की दुकान पर यूँ ही
Read Moreएक उनींदी दोपहर में डायरी के पन्नों से एकाएक मेरा बचपन यादों की खिड़की से झाँककर मुस्कुराता है, और मैं
Read Moreजाफरी साहब…! हाँ….जाफरी साहब..यही नाम था उनका। बचपन की कुछ यादों के बीच जाफरी साहब भी स्मृतियों में अकसर आते
Read More10 अप्रेल, 2013 को मैंने नवभारत टाइम्स में अपने ब्लाॅग पर एक लेख डाला, जिसका शीर्षक था- ‘हिन्दू होने का
Read Moreअब मैं चाहता हूँ कि लीला बहन के मुझ पर लिखे सभी ब्लॉग एक एक करके “मेरी कहानी” की कड़ियां
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