मेरी कहानी 200
जिंदगी फिर से पटरी पर आ गई और मैं कुलवंत के साथ गाडी में बैठ कर बच्चों को सकूल से
Read Moreजिंदगी फिर से पटरी पर आ गई और मैं कुलवंत के साथ गाडी में बैठ कर बच्चों को सकूल से
Read Moreजी हाँ! मैं रसूलपुर में स्थापित महादेवी वर्मा की साहित्यकार संसद की ही बात कर रही हूँ। मेरे लिए
Read Moreरात भर सो कर सर कुछ हल्का सा हो गया। बैड के साथ जो स्पैशल हैंडल लगाया गया था, उस
Read Moreमैं कुछ सेकुलर कहे जाने वाले दलों की सरकारों की मुस्लिमपरस्त नीतियों पर व्यंग्य करता रहता था. ऐसा ही एक
Read Moreनर्स मेरी पीठ के पीछे दो तकिये रख जाती थी । कुछ दिन बाद सुबह नर्स आई और मुझे मेरी
Read Moreऐमरजैंसी वार्ड में मैं तीन दिन तीन रातें ऐसे ही पड़ा रहा, कोई हिलजुल नहीं थी, खाना तो दूर की
Read Moreफरवरी 2013 में मैंने अपने ब्लॉग पर अपने प्रिय विषय महाभारत पर एक लेख लिखा कि मैं यह जानना चाहता
Read Moreशनिवार का दिन था । मैं सुबह दस बजे कॉलेज के लिए अपने काइनेटिक हौंडा से निकली जैसे ही मैं
Read Moreकुलवंत की इंडिया यात्रा के बाद ज़िन्दगी पहले की तरह चलने लगी। इंडिया रहकर जो जो काम हमने करने चाहे
Read Moreजिस हालात में भी मैं था, मैंने रहना कबूल कर लिया था। वक्त दौड़ा जा रहा था और मैं अपनी
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