मेरी कहानी 194
बैनमर के कहने के मुताबिक वैस्ट पार्क अस्पताल से मुझे खत आ गया कि स्पीच थेरपी के लिए मैं वहां
Read Moreबैनमर के कहने के मुताबिक वैस्ट पार्क अस्पताल से मुझे खत आ गया कि स्पीच थेरपी के लिए मैं वहां
Read Moreदो दिन घर रह कर मैं फिर हस्पताल आ गिया। मेरा ब्लड लेने रोज़ ही कोई ना कोई नर्स आ
Read Moreएक तो मैं बार बार गिर पढ़ता था, दुसरे मेरी आवाज़ बदल रही थी। गिरने का तो मुझे इतना धियान
Read Moreगोवा कैंडोलिम एअरपोर्ट से जब उड़े थे तो दुपहर का वक्त था। सुबह छै सात बजे हम इंग्लैंड की मानचैस्टर
Read Moreहंपी को देखना मेरे लिए तो बहुत ही अच्छा हुआ है क्योंकि इस से मुझे एक संतुष्टि सी ही गई
Read Moreवीरूपक्ष मंदिर में गाइड हमें एक ऐसे हिस्से में ले गया जो बहुत ही हैरानीकुन था। यह बहुत ही छोटे
Read Moreदूसरे दिन सुबह को हम जल्दी तैयार हो गए क्योंकिं हम ने हम्पी देखने जाना था। होटल की कैंटीन से
Read Moreसुबह उठे और मशवरा करने लगे कि आज कहाँ जाना था तो मैंने कहा जसवंत ! इतने दिन हो गए
Read Moreमाँ बताती हैं मैंने अपनी पहली कविता एक प्लेन क्रेश पर लिखी थी । वो अंग्रेजी में थी ,सन् 1972
Read Moreटैक्सी वाले ने जो स्क्रैच कार्ड हम को दिए थे, उन में तरसेम की हौलिडे की लाटरी निकल आई थी।
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