मेरी कहानी 170
सुबह उठ कर तैयार हुए और ब्रेकफास्ट के लिए डाइनिंग रूम में आ गए। ब्रेकफास्ट हमेशा सैल्फ सर्विस ही होती
Read Moreसुबह उठ कर तैयार हुए और ब्रेकफास्ट के लिए डाइनिंग रूम में आ गए। ब्रेकफास्ट हमेशा सैल्फ सर्विस ही होती
Read Moreबर्मिंघम से लुक्सर कोई छै घंटे का सफर था। यह वक्त खाने पीने और मैगज़ीन अखबार पढ़ने में ऐसे बीता
Read Moreसच्ची बात तो यह है कि मुझे इतिहास से लगाव तो बहुत रहा है लेकिन इतिहास को अछि तरह से
Read Moreमैं और गियानी जी उठ कर गियानी जी के कमरे में आ गए। यह कमरा घर का फ्रंट रूम ही
Read Moreहिन्दू आतंकवाद का आरोप जनवरी 13 में नवभारत टाइम्स (नभाटा) के ब्लॉग पर मैंने एक लेख लिखा जिसका शीर्षक था-
Read Moreबड़े गुरूजी ! जी हाँ ! हम लोग उन्हें बड़े गुरूजी ही कहते थे । तब हम कक्षा तीसरी के विद्यार्थी
Read Moreदिन मज़े से गुज़र रहे थे। ऐरन को स्कूल ले जाना और स्कूल बन्द होने पर उस को ले आने
Read Moreब्लॉग पर एक वर्ष पूर्ण जनवरी 13 के प्रथम सप्ताह में नवभारत टाइम्स (नभाटा) में ब्लॉग लिखते हुए मुझे
Read Moreपुर्तगाल की सैर करके हम घर आ गए और तोहफे सभी को बाँट दिए गए । जसविंदर काम पर जाने
Read Moreनागर जी से पंगा लिया मैं कड़ी 6 में संकेत कर चुका हूँ कि नवभारत टाइम्स (नभाटा) के प्रधान संपादक
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