उपन्यास : शान्तिदूत (दसवीं कड़ी)
अब कृष्ण द्रोपदी के साथ पांडवों के लौटकर हस्तिनापुर आने के बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। कृष्ण को
Read Moreअब कृष्ण द्रोपदी के साथ पांडवों के लौटकर हस्तिनापुर आने के बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। कृष्ण को
Read Moreकृष्ण के विचार अब कर्ण की ओर मुड़े। कृष्ण ने सुन रखा था कि देखने में किसी क्षत्रिय योद्धा जैसा
Read Moreकृष्ण का ध्यान अभी भी वारणावत के षड्यंत्र पर घूम रहा था। कितना गहरा षड्यंत्र था यह। सबसे पहला प्रश्न
Read Moreकाम्पिल्य से द्वारिका जाते हुए कृष्ण का ध्यान पांडवों की ओर ही लगा हुआ था। भीम के बारे में सोचते
Read Moreद्रोपदी के स्वयंवर में धनुर्वेद की कठिन प्रतियोगिता में ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन के विजयी होने के बाद की घटनायें कृष्ण की
Read Moreकृष्ण फिर पुरानी यादों में खो गये। मथुरा से सभी यादवों को निकालकर सुरक्षित द्वारिका पहुंचाना बहुत कठिन कार्य था।
Read Moreसम्राट पांडु के बारे में सोचते हुए श्री कृष्ण उदास हो गये। नियति का कैसा क्रूर खेल था कि कुरुवंश
Read Moreविराट नगर में अपने कक्ष में लेटे हुए कृष्ण की विचार श्रृंखला आगे बढ़ी। जब राजमाता सत्यवती ने समझ लिया
Read Moreअब कृष्ण भीष्म के बारे में सोचने लगे। अत्यन्त कठोर प्रतिज्ञा करने और प्रत्येक परिस्थिति में उसका पालन करने के
Read Moreवासुदेव कृष्ण की आँखों में नींद नहीं थी। इतिहास एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा था। विगत के कालखंड का आगत
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