चाहे शांति सकल संसारी। हिंसा से भय दुख दोधारी।। रौद्रा रूप भभक फैलाता । स्वाहा सौख्य महज रूलाता।।
Read Moreचाहे शांति सकल संसारी। हिंसा से भय दुख दोधारी।। रौद्रा रूप भभक फैलाता । स्वाहा सौख्य महज रूलाता।।
Read Moreजोता खेत हलधर हौले हैं। बोता बीज फसल डोले हैं।। दाता हर्षित मन फूले हैं। फूलों संग पवन झूले हैं।।
Read Moreदीदी टेंशन में दिखें, फूल रहे हैं पांवपप्पू लगे तनाव में, विफल हुए सब दांवविफल हुए सब दांव, गालियां देवें
Read Moreभोर लालिमा प्रभास, चेतना विभा उजास, ज्योति रश्मियां प्रकाश, ओस बूँद भीजिए।। धर्म कर्म प्रेम सेतु, धैर्य धार ज्ञान हेतु,
Read Moreमौसम मदमाया हुआ, उड़े अबीर-गुलालबिना मले ही गाल भै,चर तरुणी के लालचर तरुणी के लाल, ताल दइ बुढ़वा नाचेंकलियन देख
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