दोहावली
सेवा से सार्थक करे, करुणा दया विधान। मानवता खिलती जहाँ, साथ रहे भगवान।। सत्कर्मो की रोशनी, जीव दया का भान।
Read Moreदेखो कैसा हो गया, बगदीदी का हालसत्ता गई, पार्टी टूटी, होता रोज बवालहोता रोज बवाल, चले गये सभी विधायकसांसद भी
Read Moreगोरी घूंघट में हंसत, बदरी ओट मयंकछत पर छतरी तानकर, बालम लगें निशंकबालम लगें निशंक, अंक में रहि-रहि खींचेंनिरखत रंक
Read Moreमाया में हर जन फँसा, बना हुआ है हीन।ठगनी उसको ठग रही, और संग में दीन।।और संग में दीन, कौन
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreशोले बरसें गगन से,भट्ठी बनी जमीनमट्ठा, लस्सी, शीतरस, सत्तू हुए कुलीनसत्तू हुए कुलीन, गरम हो रही हवाएंखुद को पालनहार, समझने
Read Moreज्ञानी मुझको मानना, कहाँ बड़ा अपराध।सबको ये अधिकार है, मन चाहा ले साध।।मन चाहा ले साध, फ़र्क कब मुझको पड़ता।कब
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