कुण्डली
दिल्ली में कर रहे थे,जो अब तक कोहरामझारखण्ड के नाम पर, दही गई है जामदही गई है जाम, वही हैं
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreधरती पर चंदा, बरसाता है प्यार। तारों से सजता, जगमग ये संसार। दमक रहें जुगनू, अँधियारा मिटाते– मनभावन छमछम, पायल
Read Moreमाफी मांगा वह पुनः, रागा जिसका नामझूठ झूठ बस झूठ ही, बकना जिसका कामबकना जिसका काम,शरम ना इसको आएबहुरुपिए से
Read Moreजलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
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