जिंदगी की शाम
बंदिशों के पिंजरो में कैद है- मेरी जज्बातों की आजादी! पंख फड़फड़ाते है….. उड़ नहीं सकते ये परिंद….! रफ्ता रफ्ता
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Read Moreयहाँ तो हाथ भी लोग तकलीफ से मिलाते हैं, दिल क्या मिलाएंगे ? •••• निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले
Read Moreएक है “पटना” ‘वाह’ भी तो, ‘आह’ लिए भी; पर सच्चाई यही है कि ये ‘पटने’ वाली नहीं है !
Read Moreजिसने प्रसव वेदना झेलकर और मुझे खूब रुलाकर, किन्तु पिता और परिवार को मुस्कराने का अवसर प्रदान की ! कैसी
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