ग़ज़ल
नज़रे करम की आस लगाए हुए हैं हमराह में जिसकी नजरें बिछाए हुए हैं हम गुरबत के किस्सों को दबाए
Read Moreरोशनी कुछ इस तरह आजकल मेरे घर में हुआ करतीं हैंख़ून की बूंदें,बनकर अश्क आंखों से गिरा करती हैंजब भी
Read Moreनेताजी करते नहीं, जन जनता से प्यार।आता समय चुनाव का,बाँटें प्यार उधार।। नेतागण चाहें नहीं, करना पूर्ण विकास,कौन उन्हें पूछे
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